दिल्ली सरकार के एक साल पूरे: पोस्टर विवाद पर आमने-सामने आई AAP और BJP
दिल्ली की राजनीति एक बार फिर पोस्टर वार के कारण सुर्खियों में है। दिल्ली सरकार के एक साल पूरे होने पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने राजधानी के अलग-अलग इलाकों में जश्न और उपलब्धियों को दर्शाते पोस्टर लगाए। हालांकि, पार्टी का आरोप है कि इन पोस्टरों को हटाया जा रहा है और इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ है।
AAP का दावा: उपलब्धियों से घबराई BJP
AAP नेताओं का कहना है कि सरकार के एक साल के कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं में कई अहम फैसले लिए गए। पार्टी का आरोप है कि इन उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए लगाए गए पोस्टरों को जानबूझकर हटवाया जा रहा है।
पार्टी प्रवक्ताओं के अनुसार, “जब काम बोलता है तो विरोधी घबराते हैं।” उनका कहना है कि यह सिर्फ पोस्टर नहीं, बल्कि जनता के सामने सरकार की रिपोर्ट कार्ड है।
BJP का पलटवार: नियमों का उल्लंघन
वहीं BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अगर कहीं पोस्टर हटाए गए हैं तो वह नगर निगम के नियमों के तहत कार्रवाई का हिस्सा है। पार्टी का कहना है कि बिना अनुमति लगाए गए पोस्टर हटाना प्रशासनिक प्रक्रिया है, इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
BJP नेताओं का तर्क है कि “सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने के लिए नियम तय हैं, उनका पालन होना चाहिए।”
सियासी पोस्टर वार की पुरानी परंपरा
दिल्ली की राजनीति में पोस्टर वार कोई नई बात नहीं है। चुनावी मौसम हो या सरकार की सालगिरह—पोस्टरों के जरिए जनता तक संदेश पहुंचाने की परंपरा पुरानी रही है। लेकिन कई बार यही पोस्टर विवाद की वजह भी बन जाते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया क्या?
राजधानी में कुछ जगहों पर पोस्टर हटाए जाने की खबरों के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे नियमों का पालन मान रहे हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली सरकार के एक साल पूरे होने पर शुरू हुआ यह पोस्टर विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। AAP और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप की यह जंग फिलहाल थमती नहीं दिख रही। अब देखना होगा कि यह मुद्दा राजनीतिक बहस तक सीमित रहता है या प्रशासनिक स्तर पर कोई स्पष्ट निर्देश सामने आते हैं।

