गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद: ‘झूठी जानकारी को बढ़ावा नहीं…’ सरकार ने Expo से बाहर करने की वजह बताई
नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University इस समय AI Impact Summit 2026 में दिखाए गए एक तकनीकी प्रोजेक्ट को लेकर विवादों के केंद्र में है। विवाद इतना बढ़ा कि सरकार ने इस विश्वविद्यालय के स्टॉल को समिट से खाली कराने का निर्देश भी दिया है।
🤖 क्या हुआ विवाद?
AI Impact Summit के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया गया, जिसे देखने वालों ने यूनिवर्सिटी का “इन-हाउस बनाया हुआ AI डेमो” बताया। बाद में पता चला कि यह रोबोट वास्तव में चीन की कंपनी Unitree Robotics का तैयार Unitree Go2 मॉडल है, जिसे यूनिवर्सिटी ने खरीद कर शोकेस किया था, लेकिन शुरुआत में इसे अपनी टेक्नोलॉजी बताने का दावा किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद तेज़ हो गया और इस मामले ने यूनिवर्सिटी की साख पर सवाल खड़े कर दिए।
🧠 यूनिवर्सिटी का रुख
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान में माफी दी है और कहा है कि इस भ्रम के लिए वे खेद व्यक्त करते हैं। विश्वविद्यालय का दावा है कि उनके प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी, और उन्होंने यह नहीं कहा कि रोबोट यूनिवर्सिटी में विकसित किया गया था — बल्कि यह छात्रों के सीखने के टूल के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
💼 सरकार का कारण: “झूठी जानकारी को बढ़ावा नहीं”
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृ्ष्णनन ने स्पष्ट रूप से कहा कि समिट में जो भी प्रदर्शित किया जा रहा है, वह वास्तविक और प्रमाणिक काम होना चाहिए। सरकार का रुख है कि गलत या भ्रामक जानकारी को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, इसलिए विवाद के बाद यूनिवर्सिटी से स्टॉल खाली करने को कहा गया।
सच यही है कि यह समिट भारत के AI क्षेत्र में वैश्विक भूमिका को मजबूत करने का मंच है, और इस प्रकार के विवाद से सम्मेलन की छवि पर प्रभाव पड़ा है।
📌 बढ़ते सवाल
कई लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ यूनिवर्सिटी के स्टॉल को हटाना ही पर्याप्त नहीं है — इस तरह के भ्रामक प्रस्तुति के पीछे कारण और जिम्मेदारियों की जांच भी होनी चाहिए। आलोचकों का मानना है कि इससे न सिर्फ यूनिवर्सिटी की, बल्कि भारत की वैश्विक AI छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
📌 संक्षेप में:
गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट में चीनी रोबोटिक डॉग को अपने विकसित प्रोडक्ट के रूप में पेश करने को लेकर विवाद में आई, जिसके बाद सरकार ने कहा कि Expo में केवल वास्तविक और प्रामाणिक इनोवेशन दिखाए जाएं — इसलिए यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने को कहा गया।

