शांति का संदेश, आतंकवाद पर प्रहार: इजरायली संसद में PM मोदी के संबोधन की विस्तृत बातें
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इजरायल की संसद Knesset में दिए अपने संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका भाषण कूटनीतिक संतुलन, संवेदनशीलता और रणनीतिक स्पष्टता का मिश्रण माना जा रहा है।
🔶 आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जब निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जाता है, तब पूरी मानवता आहत होती है। भारत के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आतंक का दर्द भारत ने भी झेला है और इसी कारण भारत हर उस देश के साथ खड़ा है जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद को “अच्छा” या “बुरा” कहकर अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता। वैश्विक सुरक्षा के लिए एक समान और कठोर नीति आवश्यक है।
🔶 साझा मूल्यों पर आधारित रिश्ते
अपने संबोधन में मोदी ने भारत और इजरायल के बीच लोकतंत्र, नवाचार और साहस की साझा विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने कठिन परिस्थितियों में भी विकास और आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत-इजरायल संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि विश्वास और सहयोग पर आधारित दीर्घकालिक मित्रता है।
🔶 मध्य-पूर्व में शांति की वकालत
प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में जारी संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और मानवता को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा शांति प्रयासों का समर्थन करता रहा है और भविष्य में भी रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।
🔶 रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर जोर
भाषण में रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश मिलकर नई तकनीकों और अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर सकते हैं।
उन्होंने भारत में बढ़ते स्टार्टअप कल्चर और इजरायल की नवाचार क्षमता को मिलाकर “भविष्य की साझेदारी” का मॉडल बताया।
🔶 भारतीय समुदाय का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने इजरायल में रह रहे भारतीय मूल के लोगों और यहूदी समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सदियों से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय संबंध मजबूत रहे हैं।
🔶 वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
यह संबोधन केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं था, बल्कि वैश्विक राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और शांति के लिए प्रतिबद्धता—दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाएगा।
निष्कर्ष
इजरायली संसद में दिया गया यह संबोधन भारत की परिपक्व और संतुलित विदेश नीति का उदाहरण है। एक ओर आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट संदेश, तो दूसरी ओर संवाद और शांति की अपील—इन दोनों के बीच संतुलन ने इस भाषण को ऐतिहासिक बना दिया।

